सालाना २ लाख २६ हजार करोड़ के टर्नओवर वाली फिल्म इंडस्ट्री में काम करने वालो की अवस्था काफी दयनीय है। शूटिंग क्षेत्र से जुड़े लोग परेशां है। इस क्षेत्र के जानकर बताते है के सेट पर १५ से २० घंटे काम करने की बाद भी मानधन और नियमित काम की गॅरंटी नहीं है। अखिल भारतीय चित्रपट कामगार संघठन के राष्टीय अध्यक्ष श्रीअशोक दुबे ने बताया की इस मामले पर संसद में आवाज भी उठाई लेकिन अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला। श्री अशोक दुबे के मुताबिक क्षेत्र में मजदूरों को मानधन नहीं मिलता। प्रोविडेंट फण्ड,बिमा जैसी सुविधाए नहीं है। शूटिंग के समय सेट पर बैठने, शौचालय, साफ़-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

शहर के दुरदराज क्षेत्र के बंद पड़े कल-कारखाने में बने स्टूडियो में शूटिंग होती है। वसई, विरार, नायगांव में शूटिंग के समय काफी परेशानी उठानी पड़ती है, साथ ही दबंग किस्म के लोग अवरोध पैदा करते है। अपने लोगो को काम दिलाने के लिए जबरन कोशिश करते है। बातें नहीं मानने पर शूटिंग रोकने की धमकी देते है।

इस मामले की शिकायत ८ महीने पहले ठाणे पुलिस कमिशनर से की गई। शूटिंग के लिए वन विंडो योजना भी नहीं है। फिल्मो में काम करने वालो को फिल्म हिट होने पर पैसा मिलता है, लेकिन फ्लॉप होने पर नहीं मिलता। टीवी सीरियलो के ३ महीने के एग्रीमेंट होते है, उसमे भी कभी कभार पैसा नहीं मिल पता।

जानकारों का कहना है की क्षेत्र का स्कोप बढ़ा है, लेकिन मानधन नहीं बढ़ा। पिछले ५ साल से प्रोड्यूसरों और ५ लाख सदस्यों वाली फेडरेशन में कोई नया करार भी नहीं हुआ है, जिसका खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है।